रावण लंका का राजा था। उसके दस सिर थे और वह बहुत शक्तिशाली था, पर उतना ही घमंडी भी। उसे लगता था कि उसे कोई कभी नहीं हरा सकता।
एक दिन वह राम की पत्नी सीता को उठाकर लंका ले गया। उन्हें वापस लाने के लिए राम, उनके भाई लक्ष्मण, हनुमान और वानरों की सेना ने समुद्र पर पूरा का पूरा पुल बना डाला!
आख़िरी युद्ध के लिए देवताओं के राजा इंद्र ने राम की मदद के लिए अपना चमचमाता रथ भेजा। उसे इंद्र के सारथी मातलि चला रहे थे।
राम के बाणों ने रावण के सिर काट दिए। पर हर बार एक नया सिर फिर से उग आता।
तब मातलि ने राम को ब्रह्मास्त्र की याद दिलाई, जो सबसे शक्तिशाली अस्त्र था। राम ने अपना महान धनुष खींचा और उसे छोड़ दिया।

ब्रह्मास्त्र बिजली की तरह युद्धभूमि को चीरता हुआ गया और सीधे रावण के हृदय में जा लगा।

रावण के दसों सिर एक साथ चीख उठे। रावण गिर पड़ा और युद्ध ख़त्म हो गया। अच्छाई जीत गई।
बुराई उसके चेहरों पर वार करने से नहीं हारती। वार उसके हृदय पर करना होता है।
स्रोत: वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड। इंद्र अपना रथ अपने सारथी मातलि के साथ भेजते हैं, जो राम को ब्रह्मास्त्र की याद दिलाते हैं, और वह रावण के हृदय को भेद देता है।
