रावण दहन
हम दशहरा क्यों मनाते हैं?
एक दिन। बुराई पर अच्छाई की कई जीत।

तीन विजय, एक त्योहार
राम, दुर्गा और पांडव: बुराई पर अच्छाई की तीन जीत। सब पढ़ने में बस कुछ मिनट।
Iरावण पर श्रीराम की विजय
दस सिर जो बार-बार उग आते थे, और वह एक बाण जिसने सब ख़त्म कर दिया।
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IIमहिषासुर पर दुर्गा की विजय
एक राक्षस जिसे कोई देवता नहीं हरा सका, प्रकाश से बनी एक देवी, और नौ रातों का युद्ध।
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IIIपांडवों को वापस मिले उनके अस्त्र
पेड़ में छिपा एक धनुष, एक गुप्त वर्ष, और पूरी सेना के सामने अकेला एक धनुर्धर।
आगे पढ़ें →राम के बाणों ने रावण के सिर काटे, पर वे फिर उग आए। तब उन्होंने हृदय पर निशाना साधा।
रावण दहन हमें याद दिलाता है कि बुराई कितनी भी ताक़तवर हो, जड़ पर वार करने से जलकर ख़त्म हो जाती है। ऑनलाइन अपना रावण दहन करें: हृदय पर निशाना लगाएँ और अच्छाई को जिताएँ।
रावण दहन खेलेंदशहरा: आपके सवाल, हमारे जवाब
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है। इसमें तीन विजय याद की जाती हैं: श्रीराम की रावण पर विजय, देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय, और पांडवों के वनवास के अंत में अर्जुन का शमी वृक्ष से अपने अस्त्र वापस लेना।
दशहरे को विजयादशमी क्यों कहते हैं?
विजय का अर्थ है जीत और दशमी का अर्थ है दसवाँ दिन। दशहरा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को, नवरात्रि की नौ रातों के ठीक बाद आता है, इसलिए यह विजय का दसवाँ दिन है।
रावण दहन क्या है?
दशहरे की शाम रावण के विशाल पुतले को जलाना रावण दहन कहलाता है, अक्सर आतिशबाज़ी के साथ। उत्तर भारत में नवरात्रि में होने वाली रामलीला इसी के साथ पूरी होती है, और यह बुराई के अंत का प्रतीक है।
रावण के दस सिर किसके प्रतीक हैं?
कथा की एक लोकप्रिय व्याख्या में रावण के दस सिर दस बुराइयों के प्रतीक हैं: अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य, स्वार्थ, अन्याय और अमानवता। पुतला जलाना इन्हें छोड़ने का संकल्प है।
दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा क्यों होती है?
अज्ञातवास के वर्ष में पांडवों ने अपने अस्त्र शमी के पेड़ में छिपाए थे, और माना जाता है कि अर्जुन ने उन्हें विजयादशमी के दिन वापस लिया। इसीलिए परिवार शमी की पूजा करते हैं और जीत व सौभाग्य के प्रतीक के रूप में उसकी पत्तियाँ बाँटते हैं।
भारत में दशहरा कैसे मनाया जाता है?
उत्तर भारत में रामलीला के बाद रावण के पुतले जलाए जाते हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा होती है और विजयादशमी पर देवी को विदा किया जाता है। मैसूर में शाही जंबू सवारी निकलती है, दक्षिण भारत में एक दिन पहले आयुध पूजा में औज़ारों और किताबों का सम्मान होता है, केरल में बच्चे विद्यारंभ से पढ़ाई शुरू करते हैं, और तेलंगाना में शाम की पूजा के बाद जम्मी (शमी) की पत्तियाँ बाँटी जाती हैं।